✍️ लेखक परिचय — पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
क्या आपने कभी सोचा है कि एक लेखक के मन में क्या चलता है जब वो लिखने बैठता है?
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी — यह नाम हिंदी साहित्य में निबंध लेखन के लिए हमेशा याद किया जाएगा। इनका जन्म 1894 में मध्यप्रदेश के राजनांदगाँव में हुआ था। एक छोटे से शहर में जन्मे इस लेखक ने हिंदी साहित्य को एक नई दिशा दी।
बख्शी जी की पढ़ाई-लिखाई साधारण परिवेश में हुई, पर उनकी सोच असाधारण थी। उन्होंने हिंदी को अपना माध्यम चुना और जीवनभर उसी में लिखते रहे।
जीवन की मुख्य बातें:
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| पूरा नाम | पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी |
| जन्म | 1894 |
| जन्म स्थान | राजनांदगाँव, मध्यप्रदेश |
| मृत्यु | 1971 |
| प्रमुख विधा | निबंध, आलोचना |
| प्रसिद्ध पत्रिका | सरस्वती (संपादक) |
| भाषा शैली | सरल, व्यंग्यात्मक, आत्मीय |
प्रमुख रचनाएँ:
- निबंध संग्रह — पंचपात्र, तीर्थसलिल, पद्मवन, प्रबंध पारिजात
- आलोचना — हिंदी साहित्य विमर्श, विश्व साहित्य
- संपादन — सरस्वती पत्रिका का दीर्घकाल तक संपादन
बख्शी जी की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वो आम इंसान की भाषा में असाधारण बातें कह देते थे। उनके निबंध पढ़ते वक्त लगता है जैसे कोई दोस्त बात कर रहा हो — न कोई दिखावा, न कोई बनावट।
उन्होंने सरस्वती पत्रिका का संपादन किया जो उस समय हिंदी साहित्य की सबसे प्रतिष्ठित पत्रिका थी। इस पत्रिका के ज़रिए उन्होंने कई नए लेखकों को मंच दिया।
📖 पाठ परिचय
“क्या लिखूँ?” — यह शीर्षक पढ़कर पहले हँसी आती है। सोचते हैं — अरे, लेखक को भी नहीं पता क्या लिखना है?
पर यही तो बख्शी जी की खूबी है। एक साधारण सवाल के पीछे उन्होंने एक बहुत गहरी बात छुपाई है।
यह निबंध व्यंग्यात्मक शैली में लिखा गया है। इसमें लेखक ने एक लेखक की उस मनोदशा को बड़े मज़ेदार तरीके से दिखाया है जब उसे समझ नहीं आता कि किस विषय पर लिखे।
यह पाठ Class 9 Hindi की पाठ्यपुस्तक में है और आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना लिखे जाने के समय था।

📝 विस्तृत सारांश
भाग 1 — लेखक की उलझन
निबंध की शुरुआत होती है एक मज़ेदार स्थिति से।
लेखक लिखने बैठते हैं। कागज़ सामने है, कलम हाथ में है। पर दिमाग खाली है। वो सोचते हैं — “क्या लिखूँ?”
यह सवाल सुनने में बहुत छोटा लगता है। पर क्या सच में यह छोटा है? सोचो — दुनिया में कितनी घटनाएँ हो रही हैं। कितनी समस्याएँ हैं। कितने विषय हैं। फिर भी लेखक को समझ नहीं आता कि शुरुआत कहाँ से करे।
बख्शी जी यहाँ एक बहुत ज़रूरी बात कह रहे हैं — विषयों की कमी नहीं होती, दिशा की कमी होती है।
भाग 2 — दो रास्ते
लेखक के सामने दो रास्ते हैं।
पहला रास्ता — बड़े-बड़े विषयों पर लिखो। देश की समस्याएँ, समाज की बुराइयाँ, राजनीति के खेल — इन सब पर कलम चलाओ। यह रास्ता दिखने में बहुत शानदार लगता है। लोग वाह-वाह करते हैं।
पर बख्शी जी पूछते हैं — क्या यह सच्चा लेखन है? जो तुमने जिया नहीं, जो तुमने महसूस नहीं किया, उसे लिखने का क्या फायदा?
दूसरा रास्ता — अपनी छोटी-छोटी ज़िंदगी की बातें लिखो। जो आँखों के सामने है, जो दिल को छूता है, जो रोज़ की ज़िंदगी में होता है — उसे लिखो।
यह रास्ता दिखने में साधारण लगता है। पर इसमें सच्चाई है। इसमें जीवन है।
लेखक दूसरा रास्ता चुनते हैं।
भाग 3 — व्यंग्य का पुट
बख्शी जी यहाँ हल्के-फुल्के व्यंग्य से कुछ और भी कहते हैं।
वो कहते हैं कि बड़े-बड़े विषयों पर लिखना आसान है। क्यों? क्योंकि उनमें जाँच नहीं होती। कोई नहीं पूछता कि तुमने यह खुद अनुभव किया है या नहीं।
पर जब तुम अपनी ज़िंदगी की बात लिखते हो — तो हर शब्द की परीक्षा होती है। पाठक तुरंत पकड़ लेता है कि यह सच है या नकल।
इसीलिए सच्चा लेखन कठिन है। और इसीलिए सच्चा लेखन महान भी है।
भाग 4 — लेखक का निर्णय
निबंध के अंत में बख्शी जी एक स्पष्ट निर्णय पर पहुँचते हैं।
वो कहते हैं — “मैं वही लिखूँगा जो मैंने जिया है।”
यह एक साहसी निर्णय है। क्योंकि इसमें खुद को उजागर करना पड़ता है। अपनी कमज़ोरियाँ, अपनी उलझनें, अपनी सच्चाई — सब सामने रखनी पड़ती है।
पर यही तो असली साहित्य है।
निबंध का सार: लेखन में सच्चाई सबसे ज़रूरी है। अनुभव के बिना लिखा गया साहित्य खोखला होता है।
🎯 PYQs — महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
Q1. “क्या लिखूँ?” निबंध का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर:
इस निबंध में लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी ने एक लेखक की उस मनोदशा को बड़े रोचक तरीके से प्रस्तुत किया है जब उसे समझ नहीं आता कि क्या लिखे।
निबंध का मुख्य विषय है — सच्चे लेखन की परिभाषा। बख्शी जी कहते हैं कि असली साहित्य वही है जो लेखक के अपने जीवन अनुभवों से जन्म लेता है। बड़े-बड़े विषयों पर लिखना आसान है, पर उसमें सच्चाई नहीं होती।
व्यंग्यात्मक शैली में लिखा यह निबंध पाठक को हँसाते-हँसाते एक गहरी सीख दे जाता है।
Q2. लेखक के अनुसार अच्छा लेखन क्या होता है? विस्तार से बताओ।
उत्तर:
बख्शी जी के अनुसार अच्छा लेखन तीन बातों पर टिका होता है —
पहली बात — सच्चाई। जो लिखो, वो सच होना चाहिए। बनावटी भावनाएँ और दिखावटी विचार साहित्य को कमज़ोर बनाते हैं।
दूसरी बात — अनुभव। जो तुमने जिया है, जो तुमने महसूस किया है — वही लिखो। दूसरों की नकल करने से असली साहित्य नहीं बनता।
तीसरी बात — सादगी। भाषा जितनी सरल होगी, बात उतनी ही दिल तक पहुँचेगी। कठिन शब्दों से विद्वान दिखने की कोशिश करना लेखन की कमज़ोरी है।
लेखक का मानना है कि जो इंसान इन तीनों बातों को अपने लेखन में उतार लेता है, वही सच्चा साहित्यकार है।
Q3. बख्शी जी की भाषा-शैली की विशेषताएँ बताओ।
उत्तर:
बख्शी जी की भाषा-शैली उन्हें हिंदी के अन्य निबंधकारों से अलग बनाती है।
व्यंग्यात्मकता उनकी सबसे बड़ी विशेषता है। वो कठिन बातों को हँसते-हँसाते कह देते हैं। पाठक को पता ही नहीं चलता कि कब वो एक गहरी बात समझ गया।
सरलता उनकी दूसरी विशेषता है। उनके निबंधों में कोई जटिल शब्द नहीं मिलते। आम बोलचाल की भाषा में वो बड़ी-बड़ी बातें कह देते हैं।
आत्मीयता उनकी तीसरी विशेषता है। पढ़ते वक्त लगता है जैसे लेखक सीधे हमसे बात कर रहा है। यह आत्मीयता पाठक को बाँध लेती है।
स्वाभाविकता उनकी चौथी विशेषता है। उनके निबंधों में कोई बनावट नहीं है। जो मन में आया, वो लिख दिया — पर इतनी कुशलता से कि वो साहित्य बन गया।
Q4. “क्या लिखूँ?” शीर्षक की सार्थकता सिद्ध करो।
उत्तर:
यह शीर्षक पहली नज़र में बहुत साधारण लगता है। पर जैसे-जैसे निबंध पढ़ते हैं, इसकी गहराई समझ आती है।
शीर्षक सार्थक है क्योंकि —
यह सवाल सिर्फ लेखक का नहीं है। यह हर उस इंसान का सवाल है जो कुछ कहना चाहता है पर शुरुआत नहीं कर पाता। हर विद्यार्थी जो परीक्षा में निबंध लिखने बैठता है, हर व्यक्ति जो डायरी लिखना चाहता है — सबके मन में यही सवाल आता है।
इसके अलावा, यह शीर्षक पाठक में जिज्ञासा जगाता है। पढ़ते ही मन में आता है — अरे, लेखक को भी नहीं पता? तो चलो देखते हैं वो क्या लिखते हैं।
और अंत में निबंध इस सवाल का जवाब देता है — अपने अनुभव से लिखो। इस तरह शीर्षक और निबंध एक पूरा चक्र बनाते हैं।
इसीलिए यह शीर्षक पूरी तरह सार्थक है।

Q5. इस निबंध से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
उत्तर:
इस निबंध से हमें कई महत्वपूर्ण प्रेरणाएँ मिलती हैं।
पहली प्रेरणा — हमेशा सच बोलो और सच लिखो। दिखावे की बजाय सच्चाई में ज़्यादा ताकत होती है।
दूसरी प्रेरणा — अपने अनुभवों को कम मत समझो। तुम्हारी छोटी-छोटी ज़िंदगी की बातें भी किसी के लिए बहुत काम की हो सकती हैं।
तीसरी प्रेरणा — शुरुआत करने से मत डरो। “क्या लिखूँ?” का जवाब यही है — जो मन में है, वो लिखो। पहला कदम उठाओ, बाकी रास्ता खुद बन जाएगा।
चौथी प्रेरणा — सादगी में सुंदरता है। बड़े-बड़े शब्दों और जटिल विचारों से ज़्यादा असरदार होती है सरल और सच्ची बात।
🔘 MCQs — 15 प्रश्न
Q1. “क्या लिखूँ?” के लेखक कौन हैं? a) प्रेमचंद b) पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी ✅ c) हजारीप्रसाद द्विवेदी d) महादेवी वर्मा
Q2. बख्शी जी का जन्म कहाँ हुआ था? a) भोपाल b) जबलपुर c) राजनांदगाँव ✅ d) इंदौर
Q3. बख्शी जी किस पत्रिका के संपादक थे? a) धर्मयुग b) हंस c) सरस्वती ✅ d) कादम्बिनी
Q4. यह निबंध किस शैली में लिखा गया है? a) वर्णनात्मक b) व्यंग्यात्मक ✅ c) भावात्मक d) विवेचनात्मक
Q5. लेखक के अनुसार सच्चा लेखन क्या है? a) बड़े विषयों पर लिखना b) अपने जीवन अनुभवों पर लिखना ✅ c) राजनीति पर लिखना d) दूसरों की नकल करना
Q6. बख्शी जी का जन्म किस वर्ष हुआ? a) 1880 b) 1890 c) 1894 ✅ d) 1900
Q7. बख्शी जी की मृत्यु किस वर्ष हुई? a) 1960 b) 1965 c) 1971 ✅ d) 1975
Q8. बख्शी जी की भाषा की सबसे बड़ी विशेषता क्या है? a) कठिन शब्द b) व्यंग्यात्मकता और सरलता ✅ c) संस्कृत शब्दों का प्रयोग d) अंग्रेज़ी मिश्रण
Q9. निबंध में लेखक के सामने कितने रास्ते थे? a) एक b) दो ✅ c) तीन d) चार
Q10. बख्शी जी ने किस रास्ते को चुना? a) बड़े विषयों पर लिखना b) राजनीति पर लिखना c) अपने अनुभवों पर लिखना ✅ d) दूसरों की नकल करना
Q11. “क्या लिखूँ?” किस प्रकार की रचना है? a) कविता b) कहानी c) निबंध ✅ d) नाटक
Q12. बख्शी जी किस राज्य से थे? a) उत्तर प्रदेश b) मध्यप्रदेश ✅ c) राजस्थान d) बिहार
Q13. बख्शी जी के निबंध संग्रह का नाम क्या है? a) मानसरोवर b) पंचपात्र ✅ c) गोदान d) निर्मला
Q14. इस निबंध का मुख्य संदेश क्या है? a) ज़्यादा लिखो b) बड़े विषय चुनो c) सच्चे अनुभवों से लिखो ✅ d) दूसरों की नकल करो
Q15. बख्शी जी की रचनाओं में क्या नहीं मिलता? a) सरलता b) व्यंग्य c) बनावट और दिखावा ✅ d) आत्मीयता
📝 Long Questions — विस्तृत उत्तर
Q1. बख्शी जी के निबंध “क्या लिखूँ?” की साहित्यिक विशेषताएँ विस्तार से बताओ।
उत्तर:
“क्या लिखूँ?” हिंदी साहित्य का एक अनमोल निबंध है। इसकी साहित्यिक विशेषताएँ इसे अन्य निबंधों से अलग और विशेष बनाती हैं।
पहली विशेषता — व्यंग्यात्मक शैली: बख्शी जी ने इस निबंध में व्यंग्य को अपना मुख्य हथियार बनाया है। वो हँसते-हँसाते ऐसी बातें कह देते हैं जो सीधे दिल पर असर करती हैं। पाठक को लगता है कि वो मनोरंजन पढ़ रहा है, पर असल में एक गहरी सच्चाई उसके सामने आ जाती है। यही व्यंग्य की ताकत है।
दूसरी विशेषता — सरल और स्वाभाविक भाषा: इस निबंध में कोई भारी-भरकम शब्द नहीं है। बख्शी जी ने आम बोलचाल की भाषा में लिखा है। यह सरलता ही इस निबंध को हर वर्ग के पाठक तक पहुँचाती है — चाहे विद्यार्थी हो या विद्वान।
तीसरी विशेषता — आत्मीय स्वर: पूरे निबंध में एक आत्मीयता है। लेखक पाठक से सीधे बात करता है। यह स्वर निबंध को एक व्यक्तिगत पत्र जैसा बना देता है। पाठक को लगता है कि लेखक उसी से बात कर रहा है।
चौथी विशेषता — जीवन की सच्चाई: निबंध में कोई बनावट नहीं है। लेखक ने जो महसूस किया, वो लिखा। यह ईमानदारी इस निबंध को कालजयी बनाती है।
पाँचवीं विशेषता — प्रासंगिकता: यह निबंध आज भी उतना ही प्रासंगिक है। आज के युग में जब हर कोई social media पर लिखता है, तब भी यह सवाल उठता है — “क्या लिखूँ?” बख्शी जी का जवाब आज भी सही है।
Q2. “क्या लिखूँ?” के आधार पर बख्शी जी के व्यक्तित्व और विचारों पर प्रकाश डालो।
उत्तर:
किसी लेखक की रचना उसके व्यक्तित्व का आईना होती है। “क्या लिखूँ?” पढ़कर बख्शी जी के व्यक्तित्व की कई झलकियाँ मिलती हैं।
विनम्रता: बख्शी जी ने खुद के बारे में कोई बड़ी-बड़ी बातें नहीं कीं। उन्होंने सीधे स्वीकार किया कि उन्हें समझ नहीं आता क्या लिखें। यह विनम्रता उन्हें महान बनाती है। जो इंसान अपनी कमज़ोरी स्वीकार कर सके, वही सच्चा महान होता है।
ईमानदारी: उन्होंने दिखावे की बजाय सच्चाई को तरजीह दी। बड़े-बड़े विषयों पर लिखकर वाह-वाही लूटना आसान था। पर उन्होंने वो रास्ता नहीं चुना। उन्होंने सच्चाई का रास्ता चुना।
हास्यप्रियता: व्यंग्य उनका स्वभाव था। पर उनका व्यंग्य कभी किसी को चोट नहीं पहुँचाता था। वो हँसाते थे, पर साथ में सोचने पर भी मजबूर करते थे।
संवेदनशीलता: आम इंसान की ज़िंदगी उनके लेखन का केंद्र था। वो समाज के बड़े लोगों की नहीं, आम इंसान की बात करते थे।
साहस: अपनी उलझनें सार्वजनिक करना साहस का काम है। बख्शी जी ने यह साहस दिखाया और इसीलिए उनका लेखन इतना प्रभावशाली है।
📌 Quick Revision — परीक्षा से पहले याद करो
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| लेखक | पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी |
| विधा | निबंध |
| शैली | व्यंग्यात्मक |
| मुख्य विषय | सच्चे लेखन की परिभाषा |
| मुख्य संदेश | अनुभव से लिखो, सच्चाई से लिखो |
| भाषा | सरल, आत्मीय, व्यंग्यात्मक |
| पत्रिका | सरस्वती |
