Reedh Ki Haddi Class 9 : Summary, Question Answers & Character Sketch

Reedh Ki Haddi Class 9 Summary, Question Answers & Character Sketch
Reedh Ki Haddi Class 9 Summary, Question Answers & Character Sketch

जगदीशचंद्र माथुर का जीवन-परिचय (Reedh Ki Haddi Class 9)

जगदीशचंद्र माथुर हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध नाटककार, एकांकीकार और लेखक थे। उनका जन्म 16 जुलाई 1917 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर ज़िले के खुर्जा में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। पढ़ाई के बाद वे प्रशासनिक सेवा से जुड़े, लेकिन साहित्य और रंगमंच में उनकी गहरी रुचि बनी रही।

माथुर जी ने हिंदी नाटक को ऐसी भाषा दी जो प्रभावशाली होने के साथ-साथ बोलचाल के करीब भी थी। उनकी रचनाओं में पात्रों के संवाद स्वाभाविक लगते हैं। वे नाटक के माध्यम से समाज की समस्याओं, मानवीय भावनाओं और बदलती सोच को सामने लाते थे। उनके लिए नाटक सिर्फ पढ़ने की चीज़ नहीं था; उसे मंच पर देखकर और सुनकर भी समझा जाना चाहिए। इसलिए उनके नाटकों में दृश्य और संवाद, दोनों का विशेष महत्त्व है।

वे आकाशवाणी से भी जुड़े रहे और उसके महानिदेशक के पद पर कार्य किया। रेडियो के माध्यम से शिक्षा, संस्कृति और साहित्य को लोगों तक पहुँचाने में उनकी भूमिका रही। उनकी प्रमुख नाट्य-कृतियों में ‘कोणार्क’, ‘शारदीया’ और ‘पहला राजा’ शामिल हैं। उन्होंने एकांकी भी लिखे, जिनमें कम पात्रों और छोटी घटनाओं के ज़रिए बड़ी सामाजिक बात कही जाती है।

कक्षा 9 में पढ़ा जाने वाला उनका एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ इसका अच्छा उदाहरण है। इसमें विवाह के लिए लड़की को देखने की परंपरा पर सवाल उठाया गया है। एकांकी यह सोचने को मजबूर करता है कि लड़की की शिक्षा, उसकी राय और उसका आत्मसम्मान भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना किसी और का। यहाँ ‘रीढ़ की हड्डी’ साहस और स्वाभिमान का प्रतीक है।

जगदीशचंद्र माथुर का निधन 14 मई 1978 को हुआ। हिंदी नाटक और एकांकी को समृद्ध बनाने के कारण साहित्य में उन्हें आज भी याद किया जाता है।

परीक्षा के लिए याद रखने योग्य सार: जगदीशचंद्र माथुर हिंदी के प्रसिद्ध नाटककार और एकांकीकार थे। उनका जन्म 16 जुलाई 1917 को खुर्जा में हुआ था। ‘कोणार्क’, ‘शारदीया’ और ‘पहला राजा’ उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं। कक्षा 9 का एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ स्त्री के आत्मसम्मान और स्वतंत्र सोच का महत्त्व बताता है।

जगदीशचंद्र माथुर का साहित्यिक परिचय

जगदीशचंद्र माथुर हिंदी के प्रमुख नाटककार और एकांकीकार थे। उन्होंने नाटकों के माध्यम से समाज की समस्याओं, मानवीय संबंधों और व्यक्ति के आत्मसम्मान को सामने रखा। उनकी रचनाओं में विचार तो गंभीर होते हैं, लेकिन भाषा सहज और संवाद स्वाभाविक होते हैं। इसीलिए उनके नाटक पढ़ने के साथ-साथ मंच पर देखने में भी प्रभावशाली लगते हैं।

उनकी प्रमुख नाट्य-कृतियों में ‘कोणार्क’, ‘शारदीया’ और ‘पहला राजा’ शामिल हैं। कक्षा 9 में पढ़ा जाने वाला उनका एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ विवाह के लिए लड़की को देखने की परंपरा पर सवाल उठाता है। इसके जरिए लेखक बताता है कि लड़की की अपनी राय, शिक्षा और आत्मसम्मान का आदर करना ज़रूरी है।

परीक्षा में लिखने के लिए: जगदीशचंद्र माथुर हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध नाटककार और एकांकीकार थे। उन्होंने अपनी रचनाओं में सामाजिक समस्याओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी भाषा सरल, संवाद स्वाभाविक और नाटकों की शैली मंच के अनुकूल है। ‘कोणार्क’, ‘शारदीया’ और ‘पहला राजा’ उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं।

‘रीढ़ की हड्डी’ का सारांश

लेखक: जगदीशचंद्र माथुर | कक्षा 9, हिंदी

‘रीढ़ की हड्डी’ एक एकांकी है। इसमें लड़की को विवाह के लिए देखने की परंपरा के बहाने लेखक यह सवाल उठाते हैं कि क्या लड़की की शिक्षा, पसंद और राय का कोई महत्त्व नहीं है? शीर्षक में रीढ़ की हड्डी का अर्थ केवल शरीर का अंग नहीं, बल्कि अपनी बात कहने का साहस और आत्मसम्मान भी है।

1. विवाह के लिए लड़की देखने की तैयारी

रामस्वरूप की बेटी उमा को देखने के लिए गोपाल प्रसाद अपने बेटे शंकर के साथ आने वाले हैं। घर में उनके स्वागत की तैयारी हो रही है। रामस्वरूप चाहते हैं कि यह रिश्ता तय हो जाए। इसी कारण वे इस बात को लेकर चिंतित हैं कि मेहमानों के सामने उमा कैसी लगेगी और क्या कहेगी।

2. उमा की पढ़ाई छिपाने की बात

उमा पढ़ी-लिखी लड़की है, लेकिन गोपाल प्रसाद अपने बेटे के लिए अधिक पढ़ी-लिखी बहू नहीं चाहते। इसलिए रामस्वरूप उमा की शिक्षा के बारे में पूरी सच्चाई बताने से हिचकते हैं। यहाँ एकांकी में समाज की एक अजीब सोच दिखाई देती है: जिस शिक्षा पर गर्व होना चाहिए, उसे विवाह के लिए छिपाया जा रहा है।

3. गोपाल प्रसाद और शंकर का आना

गोपाल प्रसाद और शंकर उमा को देखने आते हैं। बातचीत में गोपाल प्रसाद लड़की के गुणों के बारे में पूछते हैं। उनका व्यवहार ऐसा है जैसे वे उमा को एक व्यक्ति के रूप में जानने के बजाय विवाह के लिए उसकी जाँच कर रहे हों। शंकर अधिकतर चुप रहता है और अपने पिता की बातों का विरोध नहीं करता।

4. उमा को सामने बुलाना

उमा को मेहमानों के सामने बुलाया जाता है। उससे उसके गुणों और रुचियों के बारे में पूछा जाता है। इस दृश्य में उमा असहज महसूस करती है, क्योंकि उसके सामने बैठे लोग उसकी भावनाओं या इच्छा को समझने की कोशिश नहीं करते। वे मानो यह देखना चाहते हैं कि वह उनकी अपेक्षाओं पर खरी उतरती है या नहीं।

5. उमा का विरोध

आखिरकार उमा इस व्यवहार का विरोध करती है। वह साफ़ शब्दों में जताती है कि लड़की कोई बेची या परखी जाने वाली वस्तु नहीं है। उसकी भी अपनी सोच, शिक्षा और गरिमा है। जब उसकी पढ़ाई को छिपाने और उसे सवालों के आधार पर परखने की बात सामने आती है, तो उमा चुप रहने के बजाय अपनी बात कहती है।

उमा के शब्दों से गोपाल प्रसाद नाराज़ हो जाते हैं। शंकर फिर भी अपने पिता के सामने स्वतंत्र राय रखने का साहस नहीं दिखाता।

6. एकांकी का अंत और शीर्षक का अर्थ

उमा के विरोध के बाद विवाह की बातचीत बिगड़ जाती है। लेकिन लेखक की दृष्टि में उमा की आवाज़ दबती नहीं, बल्कि और स्पष्ट होकर सामने आती है। वह अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करती।

शीर्षक ‘रीढ़ की हड्डी’ का गहरा अर्थ यहीं समझ आता है। उमा में गलत बात का विरोध करने का साहस है। इसके उलट शंकर अपनी बात कहने के बजाय पिता के पीछे खड़ा रहता है। एकांकी हमें सोचने पर मजबूर करता है कि असली ‘रीढ़’ किसके पास है।

Reedh Ki Haddi Class 9 mind map

‘रीढ़ की हड्डी’ पात्र-परिचय (Character Sketch)

उमा

उमा एक शिक्षित, स्वाभिमानी और साहसी युवती है। वह शुरुआत में मेहमानों के सामने सहज नहीं है, लेकिन अपमानजनक व्यवहार को हमेशा चुपचाप नहीं सहती। वह अपनी शिक्षा को कमी नहीं मानती और इस बात का विरोध करती है कि विवाह के नाम पर लड़की को वस्तु की तरह परखा जाए। उमा इस एकांकी में स्त्री के आत्मसम्मान और स्वतंत्र सोच का प्रतिनिधित्व करती है।

शंकर

शंकर गोपाल प्रसाद का बेटा है, जिसके लिए उमा को देखने आया गया है। वह अपने पिता की बातों के सामने अधिकतर चुप रहता है। वह उमा के साथ हो रहे अनुचित व्यवहार पर भी अपनी स्वतंत्र राय नहीं रख पाता। इसीलिए उसका चरित्र एक सवाल खड़ा करता है: केवल पढ़ा-लिखा होना काफी है, या सही बात के लिए बोलने का साहस भी ज़रूरी है?

गोपाल प्रसाद

गोपाल प्रसाद शंकर के पिता हैं। वे अपने बेटे के लिए बहू चुनने आए हैं, लेकिन उमा से बातचीत करते समय उनके व्यवहार में पुरानी और पुरुष-प्रधान सोच दिखाई देती है। वे लड़की की शिक्षा और व्यक्तित्व को बराबरी के नज़रिए से नहीं देखते। उमा के विरोध करने पर वे नाराज़ हो जाते हैं।

रामस्वरूप

रामस्वरूप उमा के पिता हैं। वे अपनी बेटी का विवाह कराना चाहते हैं और इस चिंता में उसकी पढ़ाई की सच्चाई छिपाने तक को तैयार हो जाते हैं। वे बेटी के विरोधी नहीं हैं, लेकिन समाज और रिश्ते की चिंता में उसकी शिक्षा तथा राय के साथ पूरी दृढ़ता से खड़े नहीं हो पाते। उनका चरित्र दिखाता है कि सामाजिक दबाव अच्छे इरादे वाले व्यक्ति को भी गलत समझौता करने पर मजबूर कर सकता है।

प्रेमा

प्रेमा उमा की माँ हैं। वे घर में लड़की देखने की तैयारी का हिस्सा हैं और बेटी के विवाह को लेकर चिंतित दिखाई देती हैं। उनके माध्यम से उस परिवार का घरेलू वातावरण समझ में आता है जहाँ लड़की के विवाह को बहुत महत्त्व दिया जाता है।

मुख्य संदेश: विवाह में लड़की और लड़के, दोनों की शिक्षा, राय और सम्मान का बराबर महत्त्व होना चाहिए। किसी व्यक्ति की असली ताकत उसकी स्वतंत्र सोच और सही बात कहने के साहस में है।

‘रीढ़ की हड्डी’ पात्र-परिचय (Character Sketch)

‘रीढ़ की हड्डी’ — बहुविकल्पीय प्रश्न, उत्तर और कारण

1. एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ का शीर्षक किसका प्रतीक है?

(क) शरीर के एक आवश्यक अंग का
(ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का
(ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
(घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का

सही उत्तर: (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का।

यह उत्तर क्यों उपयुक्त है? एकांकी में ‘रीढ़ की हड्डी’ का प्रयोग प्रतीक के रूप में हुआ है। उमा में अपना सम्मान बचाने और गलत व्यवहार का विरोध करने का साहस है। इसलिए शीर्षक शारीरिक रीढ़ से अधिक व्यक्ति के आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता की ओर संकेत करता है।

2. ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है?

(क) पात्रों की निर्धनता और लाचारी पर
(ख) पात्रों की भाषा और हास्य पर
(ग) विवाह और अशिक्षा पर
(घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर

सही उत्तर: (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर।

यह उत्तर क्यों उपयुक्त है? एकांकी में लड़की को विवाह के लिए वस्तु की तरह देखने और उसकी अधिक पढ़ाई को दोष मानने वाली सोच पर व्यंग्य है। लेखक विवाह या शिक्षा का विरोध नहीं करते, बल्कि उनसे जुड़ी अनुचित सामाजिक मान्यताओं पर सवाल उठाते हैं।

3. “घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं।” यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है?

(क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता
(ख) अनुभव और विवेक की कमी
(ग) चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता
(घ) उदासीनता और एकाकीपन

सही उत्तर: (क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता।

यह उत्तर क्यों उपयुक्त है? उमा यहाँ शंकर की शारीरिक रीढ़ की बात नहीं कर रही। उसका संकेत इस ओर है कि शंकर अपने पिता के सामने स्वतंत्र रूप से बोलने और सही बात का साथ देने का साहस नहीं दिखाता।

4. “जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है।” उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ क्या है?

(क) बड़ी-बड़ी डिग्रियाँ प्राप्त करना
(ख) कॉलेज में पढ़ना और नौकरी पाना
(ग) माता-पिता और पति को प्रसन्न रखना
(घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना

सही उत्तर: (घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना।

यह उत्तर क्यों उपयुक्त है? उमा अपनी पढ़ाई की बात छिपाने के बजाय सच बताती है और अपना पक्ष रखती है। उसके व्यवहार से स्पष्ट होता है कि शिक्षा का महत्त्व केवल डिग्री में नहीं, बल्कि स्वतंत्र सोच और आत्मविश्वास में भी है।

5. गोपाल प्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं?

(क) दोनों प्रगतिशील हैं और रूढ़ियों को नकारते हैं।
(ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
(ग) दोनों शिक्षा और रूढ़ियों के समर्थक हैं।
(घ) दोनों संगीत और स्वादिष्ट भोजन के प्रेमी हैं।

सही उत्तर: (ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।

यह उत्तर क्यों उपयुक्त है? गोपाल प्रसाद बहू चुनते समय रूढ़िवादी सोच दिखाते हैं। दूसरी ओर रामस्वरूप रिश्ता तय कराने की चिंता में उमा की शिक्षा छिपाना चाहते हैं। दोनों के व्यवहार पर सामाजिक दिखावे और पुरानी मान्यताओं का प्रभाव दिखाई देता है।

6. इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है?

(क) औपचारिक और शुष्क
(ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण
(ग) काव्यात्मक और प्रश्नात्मक
(घ) भावुक और संक्षिप्त

सही उत्तर: (ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण।

यह उत्तर क्यों उपयुक्त है? पात्रों की बातचीत सामान्य जीवन जैसी लगती है। साथ ही, कई संवादों के माध्यम से विवाह से जुड़ी रूढ़िवादी सोच पर व्यंग्य किया गया है। इसलिए स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण इस एकांकी की संवाद शैली का सबसे सटीक वर्णन है।

‘रीढ़ की हड्डी’ प्रश्न और उत्तर

प्रश्न 1. बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वंद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए।

(संकेत: उमा के साथ उनका व्यवहार, विवाह के लिए दिखावे करना किंतु इन प्रयासों को छिपाने की चेष्टा करना आदि।)

उत्तर: बाबू रामस्वरूप ने अपनी बेटी उमा को कॉलेज तक पढ़ाया है। यह एक आधुनिक सोच वाला कदम लगता है। लेकिन जब गोपाल प्रसाद और शंकर उसे विवाह के लिए देखने आते हैं, तो रामस्वरूप उमा की बी.ए. तक की पढ़ाई छिपाने की कोशिश करते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि अधिक पढ़ी-लिखी लड़की होने पर रिश्ता नहीं होगा।

वे मेहमानों के सामने उमा को अच्छे ढंग से प्रस्तुत करना चाहते हैं और विवाह के लिए तैयारी भी करते हैं, लेकिन इस दिखावे को स्वाभाविक बातचीत जैसा बनाए रखना चाहते हैं। उमा की इच्छा और आत्मसम्मान से अधिक उन्हें रिश्ता तय होने की चिंता रहती है। इस तरह, बेटी को शिक्षित करने और फिर उसी शिक्षा को छिपाने का विरोधाभास रामस्वरूप के आधुनिक व्यवहार और रूढ़िवादी सोच के बीच का अंतर्द्वंद्व दिखाता है।

प्रश्न 2. ‘रीढ़ की हड्डी’ का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है। उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।

उत्तर: ये दो पात्र उमा और शंकर हैं। उमा के संदर्भ में ‘रीढ़ की हड्डी’ उसके आत्मसम्मान, स्वतंत्र विचार और अन्याय का विरोध करने के साहस को दर्शाती है। वह अपने साथ हो रहे अपमानजनक व्यवहार पर चुप नहीं रहती।

शंकर के संदर्भ में यह शब्द नैतिक साहस की कमी की ओर संकेत करता है। वह अपने पिता के सामने अपनी स्वतंत्र राय नहीं रख पाता। जब उमा शंकर की ‘रीढ़ की हड्डी’ के बारे में पूछती है, तो उसका आशय शारीरिक हड्डी से नहीं, बल्कि उसके व्यक्तित्व की दृढ़ता से होता है।

प्रश्न 3. “मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।” प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?

उत्तर: प्रेमा के इस कथन से पता चलता है कि उस समय बहुत-सी स्त्रियों को शिक्षा पाने के पर्याप्त अवसर नहीं मिले थे। इसलिए पढ़ाई-लिखाई उनके लिए सहज और ज़रूरी चीज़ के बजाय एक कठिन ‘जंजाल’ जैसी लग सकती थी।

यह कथन उस सामाजिक सोच को भी सामने लाता है जिसमें लड़की की शिक्षा से अधिक उसके विवाह और घर-गृहस्थी को महत्त्व दिया जाता था। प्रेमा की बात को केवल उनकी व्यक्तिगत कमी नहीं मानना चाहिए; यह उस समय स्त्रियों की शिक्षा को लेकर समाज में मौजूद सीमाओं और धारणाओं को भी दिखाती है।

प्रश्न 4. लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, जो इसकी मुख्य बात को दर्शाए, तो वह क्या होगा और क्यों?

उत्तर: लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शीर्षक इसलिए चुना होगा क्योंकि यह एकांकी की मुख्य बात को प्रतीकात्मक ढंग से व्यक्त करता है। शरीर को सीधा रखने के लिए रीढ़ ज़रूरी है; उसी तरह जीवन में आत्मसम्मान और सही बात के लिए खड़े होने का साहस ज़रूरी है। उमा में यह साहस है, जबकि शंकर में इसकी कमी दिखाई देती है। इसलिए यह शीर्षक पाठक को सोचने पर मजबूर करता है कि वास्तव में दृढ़ व्यक्तित्व किसका है।

मैं इस एकांकी का दूसरा शीर्षक ‘उमा का आत्मसम्मान’ रखना चाहूँगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि उमा खुद को विवाह के लिए परखी जाने वाली वस्तु मानने से इनकार करती है और अपनी शिक्षा तथा विचारों के साथ सम्मानपूर्वक खड़ी होती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. उमा की पढ़ाई को विवाह की बातचीत में क्यों छिपाया जा रहा था?
  2. गोपाल प्रसाद लड़की देखने आए थे या उसकी परीक्षा लेने? एकांकी के आधार पर समझाइए।
  3. शंकर के व्यवहार से उसके व्यक्तित्व की कौन-सी कमजोरी सामने आती है?
  4. उमा ने अपने आत्मसम्मान की रक्षा कैसे की?
  5. ‘रीढ़ की हड्डी’ शीर्षक का प्रतीकात्मक अर्थ लिखिए।
  6. रामस्वरूप के व्यवहार में दिखाई देने वाला विरोधाभास स्पष्ट कीजिए।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

  1. ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में स्त्री-शिक्षा और विवाह संबंधी सामाजिक सोच पर किस प्रकार व्यंग्य किया गया है?
  2. उमा का चरित्र-चित्रण कीजिए। वह एकांकी के अन्य पात्रों से किस प्रकार अलग है?
  3. “शिक्षित होना और स्वतंत्र विचार रखना, दो अलग बातें हैं।” इस कथन को उमा और शंकर के संदर्भ में समझाइए।

तैयारी की छोटी-सी ट्रिक: प्रश्न 1, 4, 5 और 8 अच्छे से तैयार कर लो। इनसे स्त्री-शिक्षा, आत्मसम्मान, शीर्षक और चरित्र-चित्रण चारों मुख्य विषय कवर हो जाते हैं।

संवादहीन शेखर जोशी Chapter Notes Class 9

Yatindra Mishra – Aisi Bhi Baatein Hoti Hain

One thought on “Reedh Ki Haddi Class 9 : Summary, Question Answers & Character Sketch”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *